संघ साहित्य दिग्दर्शन

  • साहित्य वह दर्पण है जो समाज को उसको भूत, भविष्य व वर्तमान परिस्थितियों एवं परिप्रेक्ष्यों से अवगत कराता है। हुक्मसंघ की साहित्य महायात्रा में अब तक 200 से अधिक साहित्यों का सृजन हो चुका है।
  • जिनवाणी की साधना का लाभ जन-जन तक पहुंचाने के लिए सत् साहित्यकार सृजन की दिशा में प्रवृत्त होता है और मानव कल्याण हेतु यह अमूल्य निधि अपने प्रदेय के रूप में भविष्य की पीढ़ियों के लिए छोड़ जाता है। इस वृहद स्तर के साहित्य से संस्कार निर्माण, धर्मप्रभावना, आध्यात्मिक विकास, सामाजिक पुर्नजागरण इत्यादि को प्रवर्तक बल मिलता है। आंशिक मूल्य में साहित्य विक्रय के साथ-साथ साहित्य सदस्यता योजना भी चलाई जा रही है। 1500 रूपए शुल्क भरकर आजीवन सदस्यता ग्रहण करने पर 80 से अधिक साहित्य एक साथ प्रदान किए जाते हैं। वर्तमान में साहित्य सदस्य संख्या 3100 से अधिक है।
  • आचार्य श्री नानेश की अनुपम कृति जिणधम्मो के 16 संस्करण प्रकाशित किए जा चुके हैं व कथा एवं प्रवचनों के श्रृंखलाबद्ध रूप में 49 भाग तक प्रकाशित हो चुके हैं। आचार्य श्री रामलालजी म.सा. के प्रभावशाली प्रेरक प्रवचनों का संकलन करते हुए श्री राम उवाच का 12 भागों में प्रकाशन किया जा चुका है। अनेकों चारित्र आत्माओं के ज्ञान से परिप्लुत सत साहित्यों का भी सृजन किया जा चुका है और वर्तमान में अनेकों नवीन साहित्यों की रचना हो रही है।
  • आचार्य-प्रवर 1008 श्री रामलालजी म.सा. एवं समस्त चारित्रात्माओं को वंदन एवं आभार ज्ञापित करते हुए हम उन अर्थ सहयोगियों को भी साधुवाद देते हैं जिनके अर्थ सौजन्य से संघ साहित्य ने बिन्दु से सिंधु तक की महायात्रा तय की। साहित्य सरिता इसी प्रकार अविरल गतिमान रहे, इन्हीं शुभकामनाओं के साथ।
साहित्य विवरणिका