ताप और तप

किं जीवनं

ज्योतिर्मय की ज्योतिधारा

बनो अभय तो पाओ जय

क्रांतिकारी कदम आगे बढ़ते रहें

शांति के सोपान

नव विधान

आध्यात्मिक ज्योति

चेतन अपने घर आओ

प्रवचन पीयूष

मन की माला

समता मति गति दृष्टि की

अपने को समझे तृतीय पुरुष

आपका भविष्य आपके हाथ में

मनुष्यों को देवताओ का नमन

दुःख और सुख

सच्चा सौन्दर्य

निर्वाण और ज्योति

सर्वत्याग की साधना

सर्व मंगल सर्वदा