अनन्य महोत्सव 2020

आचार्य श्री नानेश जन्म शताब्दी 

जैन संस्कृति गौरव, समता दर्शन के प्रणेता, समीक्षण ध्यान-योगी आचार्य श्री नानेश का जन्म शताब्दी वर्ष 2020 भव्य स्वरूप में मनाया जाएगा जिसके अंतर्गत ज्ञान दर्शन चरित्र एवं तप की उत्कृष्ट आराधना, उत्सव, समारोह, अनुष्ठान के साथ-साथ प्रबल धर्म प्रभावना का भी लाभ होगा। शताब्दी वर्ष के पूर्ववर्ती कालावधि में सभी प्रवृत्तियों के संचालन एवं विकास में गतिशीलता अपेक्षित है, तथापि निम्न अभिनव उपक्रमों को शताब्दी वर्ष के परिप्रेक्ष्य में विस्तृत व व्यापक स्वरूप देना होगा।

1. श्रुत आराधक पंचवर्षीय पाठ्यक्रम:इस अभिनव प्रकल्प में सन् 2020 तक उत्कृष्ट गुणवत्ता प्राप्त, ध्यान-ज्ञान में पारंगत, श्रावक श्राविकाओं का एक उच्चतर वर्ग प्रशिक्षित करने हेतु संघ संकल्पित है। आचार्य श्री नानेष जन्म शताब्दी 2020 तक 500 श्रुत आराधक बनाने का लक्ष्य है। इस पंचवर्शीय पाठ्यक्रम का चतुर्थ वर्ष गतिमान है। इसमें 780 संघनिष्ठ  श्रावक/श्राविकाएं तीसरे चरण के प्रथम अवसर में उत्तीर्ण हुए।

2. पंचसहस्त्री श्रद्धाभिषिक्त परिवारांजलि: अनन्य महोत्सव 2020 तक 5000 साधुमार्गी परिवार आर्चाय भगवन् द्वारा प्रदत्त 9 अंजलियां ग्रहण करने हेतु संकल्पित हैं! इनमें 4344 साधुमार्गी परिवारों ने विभिन्न अंजलियां ग्रहण की हैं। संत भक्ति-विहार भक्ति परिवार: अनन्य महोत्सव 2020 तक 5000 साधुमार्गी परिवार संत भक्ति-विहार भक्ति परिवार बनने हेतु संकल्पित हैं। इनमें लगभग एक हजार श्रावक/श्राविकाओं ने इस संकल्प को ग्रहण किया।

3. उत्क्रांति: सामाजिक कुरीतियों, जैसे दहेज, आडंबर, अपव्यय, नाचगान में अशिष्ट प्रदर्शन इत्यादि के उन्मूलन हेतु परमागम रहस्यज्ञाता, रत्नत्रय के महान आराधक आचार्य श्री रामलालजी म.सा. ने उत्क्रांति स्वरूप एक चुनौतीपूर्ण आयाम प्रस्तुत किया है। सन् 2020 तक समस्त साधुमार्गी परिवारों को उत्क्रांति परिवार बनाने का लक्ष्य है। लगभग 5000 साधुमार्गी परिवार एवं 291 उत्क्रांति ग्राम पूज्य गुरुदेव के आह्वान से संकल्प ग्रहण कर चुके हैं।

4. श्रमणोपासक अभिनंदन संग्रह: जन्म शताब्दी वर्ष तक सभी साधुमार्गी परिवारों के सदस्यों का अंचलवार छायाचित्रों का एलबम प्रकाशित करने का लक्ष्य है जिसमें संदर्भित नाम एवं शहर भी विवरणित होंगे। इसमें पूरे भारतवर्ष से 22000 सदस्यों के फोटो संग्रहित हो चुके हैं। आनलाइन प्रकाशन भी प्रस्तावित है ताकि डाटा में संशोधन हो सके। परिवार के प्रत्येक सदस्य का फोटो एवं विवरण केन्द्रीय कार्यालय को भेजें।

5. आगम भक्ति: प्रकल्प के अंतर्गत आचार्य श्री नानेश ने नौ आयाम प्रदान किये हैं। इन आयामों का उद्देश्य अधिक से अधिक श्रावक/श्राविकाओं में आगम ज्ञान के प्रति रुचि जगाना है तथा उन्हें आगम ज्ञान का ज्ञाता बनाना है। संघ के 4566 श्रावक/श्राविकाएं इन आयामों से जुड़कर ज्ञान-दर्शन -चरित्र की अपूर्व आराधना में अपना योगदान दे रहे हैं।