आचार्य श्री नानेश जन्म शताब्दी महोत्सव 2020


पंचसहस्त्री श्रद्धाभिषिक्त परिवारांजलि

पंचसहस्त्री श्रद्धाभिषिक्त परिवारांजलि प्रपत्र

1. रात्रीभोजन त्यागांजलि परिवार:

5000 साधुमार्गी परिवार ऐसे हों जिनमें कम से कम एक व्यक्ति आजीवन रात्रि तिविहार का त्याग करें। किसी के पहले से हो तो भी वह मन्जूर होगा। यह मुख्य रूप से साधुमागी। परिवारों की बात है। न दूध खुला है और न चाय। बीमारी की छुट है। इस प्रकार के रात्रि तिविहार  त्याग पालन करने वाल परिवार का नाम रहेगा- ‘‘ रात्रि भोजन त्यागांजलि परिवार ’’ अर्थात् रात्रि भोजन के त्याग से अंजलि देने वाले परिवार।

2. सचित जल ग्रहण त्यागांजलि परिवार:

5000 साधुमार्गी परिवार ऐसे हों, जिनमें से कम से कम एक सदस्य घर में रहतें हुए सचित पानी का त्यागी हो। कच्चे पानी के स्थान पर धोवन या गर्म पानी का उपयोग किया जा सकता है। शक्कर, ईलायची,मिश्री,लौंग का घोलन नहीं चलेगा। घर पर रहते हुए सचित पानी का उपयोग नही करना। बाहर या यात्रा की बात अलग है। परिवार का कम से कम एक सदस्य। ऐसे परिवाल जो इस प्रत्याख्यान का पालन करेेंगें, वे कहलाएँगे-‘‘ सचित जल ग्रहण त्यागांजलि परिवार’’।

3. ज्ञानांजलि परिवार:

5000 साधुमार्गी परिविार ऐसे हों, जिनमें – (1) कम से कम एक सदस्य को सामयिक सूत्र कठस्थ हो व प्रतिदिन एक सामायिक करता हो। (2) कम से कम एक सदस्य को प्रतिक्रमण सूत्र कठस्थ हो व प्रतिमाह कम से कम दो बार प्रतिक्रमण करता हो। (3) कम से कम एक सदस्य को पच्चीस बोल याद हों व प्रतिमाह कम से कम एक बार फेरता हो। ये तीनों जिस परिवार में हो, उसे ‘‘ज्ञानांजलि परिवार’’ कहा सकता है। उपयुक्र्त तीनों बातें चाहे किसी भी परिवार के एक ही सदस्य में हो या अलग-अलग तीन सदस्यों में, किंतु तीनों बातें उस परिवार में होना जरूरी है।

4. पौषधांजलि परिवार:

5000 साधुमार्गी परिवार ऐसे हो जिनमें कोई एक व्यक्ति प्रतिमाह एक पौषध् या एक दया करने वाला हो। दया भाव नहीं दया। दिन और रात। ऐसे परिवारों को कहा जाएगा- ‘‘पौषधांजलि परिवार’’। इसमें दिन-रात पौषध में रहना होगा। स्थानक में रहकर पोैषध, दया करना है। ऐसा नहीं कि दिन में दुकान पर बैठे है और रात को पौषध करने आ गए। दिन भर ज्ञान आराधना, धर्म आराधना होनी चाहिए। जहाँ तक हो सके स्थानक में करना है। अगर स्थानक में सतियाॅ जी म.सा. विराजें हों या फिर अन्य कारण हो तो घर पर भी किया जा सकता है।

5. संवरांजलि परिवार:

5000 साधुमार्गी परिवार ऐसे हों, जिनमें कम से कम एक सदस्य एक पुरी रात ( सूर्यास्त से लेक अगले दिन सूर्योदय तक) का संवर प्रत्येक माह में कम से कम एक बार करने वाला हो। इसे कहेगें-‘‘संवरांजलि परिवार’’।

6. शुद्धभिक्षांजलि परिवार:

5000 साधुमार्गी परिवार ऐसे हों, जिनके सभी सदस्य साधु-साध्वियों को गोचरी-पानी बहराने में बिल्कुल दोष न लगाए। घर में जितने सदस्य हैं, सब के सब जब जी मुनिवर्ग को भिक्षा बहराएं तो कदापि सदोष न बहराएं। इस अंजलि में परिवार के सभी सदस्यों की सहभागिता आवश्यक है। इस प्रकार की तैयारी करने वाले परिवारों का नाम रहेगा-‘‘शुद्ध भिक्षांजलि परिवार’’। शुद्ध भिक्षा देने के पहले ये भी जो जानना होगा कि भिक्षा के दोष कौन-कौन से हैं। इसलिए पहले भिक्षा के दोषों को जानना।

7. संकल्प सूत्रांजलि परिवार:

5000 साधुमार्गी ऐसे हों, जिनमें कम से कम एक सदस्य माह में एक बार साधुमार्गी संकल्प सुत्र का वाचन करने वाला हो। कुछ समय पहले दुर्ग चातुर्मास में समय साधुमार्गी संकल्प सूत्र बना था, उन संकल्प सूत्रों का महीने में एक बार वाचन करने वाला। कम से कम एक बार परिवार में एक व्यक्ति उनको बांचे। संकल्प सूत्रों का महीनें में एक बार वाचन करने वाल परिवार होगा-‘‘संकल्प सूत्रांजलि परिवार’’।

8. संघ सेवांजलि परिवार:

5000 साधुमार्गी परिवार में कोई एक सदस्य सप्ताह में तीन घण्टे समाज और संघ की सेवा करेगा। संघ सेवा, जैसे- घर-घर में जाकर व्यक्ति-व्यक्ति को धार्मिक अध्ययन की प्रेरणा देना, संस्कार पाठ्यक्रम के अध्ययन की प्रेरणा देना इत्यादि। ये सभी संघ के ही काम हैं। कब तक करना ? जब तक शरीर चले। इसे कहेंगंे-‘‘संघ सेवांजलि परिवार’’।


9. नवम् अंजलि-संस्कार संवर्धन अंजलि :


 समता विभूति आचार्य श्री नानेश 97 जन्म जयन्ती के पावन प्रसंग पर रत्नत्रय के महान आराधक, श्रीमदजैनाचार्य श्री १००८ श्री रामलालजी म.सा. की दिव्य देशना व्यक्ति, परिवार, समाज ,एवं राष्ट्र के आध्यात्मिक विकास के लिए ‘‘संस्कार संवर्धन अंजलि” की उद्घोषणा। कम से कम 10000 श्रावक श्राविकाए आजीवन निम्न प्रकार की दिनचर्या का अनुपालन करे
  1.  सूर्योदय से पूर्व जागृत लेना
  2.  10 मिनट – आत्म चिंतन
  3.  15 – मिनट बच्चो को धार्मिक शिक्षा

संत भक्ति परिवार


श्री अ.भा.साधुमार्गी जैन संघ अनन्य महोत्सव 2020 (आचार्य श्री नानेश जन्म शताब्दी) ‘‘संत भक्ति परिवार’’ कर्म निर्जरा का अभिनव उपक्रम चारित्रात्माओं का स्मरण, दर्शन, श्रवण, वंदन उनकी महनीय सेवा ही नहीं अपितु हुक्मेश परंपरा के महान आचार्यों, संतों व साध्वियों के प्रति श्रद्धा की अभिव्यक्ति है, श्रावक धर्म की सम्यक् आराधना है। वे आत्माएं अप्रतिम हैं, उदाŸा हैं जो सर्वतोभावेन समर्पणा के साथ, गुरू भगवन् के नेश्राय में, जैन धर्म की प्रबल प्रभावना करते हुए, कठोर संयम का पालन करते हुए मोक्ष प्राप्ति के महामार्ग पर अग्रसर हो रही हैं। आइए, हम इनकी सेवा हेतु संकल्पित होते हुए, इनके आध्यात्म-ज्योत के लौ से अपने अंतर में चिन्गारी पैदा करते हुए, मिथ्यात्व व अज्ञान का अंधकार छितराते हुए, एक अभिनव प्रकाश से अपना जीवन आलोकित करें। इस पुनीत सेवा कार्य का सुअवसर सुगम करने हेतु एक नूतन आयाम, ‘संत भक्ति परिवार’ संकल्पित किया गया एवं 20 जुलाई 2016 के मुंबई में आयोजित कार्यसमिति बैठक में प्रस्तावित, चर्चित व पारित हुआ। चरित्रात्माओं के प्रति सभी साधुमार्गी परिवार श्रद्धावनत तो हैं ही, तथापि इस आस्था की परिणति सक्रियता व सेवा में होना वांछनीय है। उपरोक्त आयाम में चारित्रात्माओं के दर्शन/वंदन तथा सेवा की परिकल्पना है। ‘संत भक्ति परिवार’ से यह अपेक्षित होगा कि जहां परिवार निवासरत है उस केंद्र बिंदु से 3 ज्ञड के क्षेत्र/परिधि में जो चारित्रात्मा विराजित हों, उनका दर्शन अवश्य करे तथा उनके सानिध्य को सुवर्ण अवसर समझकर सेवा का हितलाभ व पुण्य भी अर्जित करे। परिवार का कोई भी सदस्य यह पुनीत कार्य निश्पन्न कर सकता है। आचार्य श्री नानेश के जन्म शताब्दी वर्ष 2020 के परिप्रेक्ष्य में 5000 ऐसे समर्पित परिवारों को ‘‘पूर्व तैयारी’’ के अंतर्गत संकल्प-बद्ध करना है। इन परिवारों को ‘‘संत भक्ति परिवार’’ की संज्ञा दी जाएगी।

इस ‘‘संत भक्ति परिवार ’’ में कैसे सहभागी बनें? 1. उपरोक्त संत भक्ति परिवार से जुड़ने के पहले आप सभी सदस्य उपरोक्त संत भक्ति की संकल्पना आत्मसात करें। 2. आपका नाम इस महायज्ञ में तभी संलग्न होगा,जब इसकी सूचना केन्द्रीय कार्यालय में निम्न माध्यम से भेजी जायगी। एस.एम.एस, 9269599909 व्हाट्सएप्प, 9269599909 ईमेल: ho@sadhumargi.com  डाक: केन्द्रीय कार्यालय के पते पर केन्द्रीय कार्यालय: ‘समता भवन’ आचार्य श्री नानेश मार्ग, नोखा रोड, जैन पी.जी.काॅलेज के सामने, गंगाशहर, बीकानेर – 334401 (राज.) फोन: 0151-2270261-62, 2270359 (फैक्स) वेबसाईट: www.sadhumargi.com   email : –  ho@sadhumargi.com उदाहरण: जैसे यदि आपके परिवार ‘‘संत भक्ति परिवार’’ व्रत ग्रहण किया है, तो उसका एस.एम.एस./व्हाट्सएप्प/ईमेल इस प्रकार होगा – संत भक्ति परिवार/परिवार का नाम/शहर का नाम/मोबाईल नम्बर ली


विहार भक्ति परिवार


श्री अ.भा.सा.जैन संघ द्वारा प्रदत्त अभिनव सेवा प्रकल्प ‘पंचसहस्त्री विहार भक्ति परिवार’ संघ के नवीन सत्र (2015-17) की प्रथम कार्यसमिति बैठक 09 जनवरी 2016 को रतलाम में आयोजित हुई थीं। सदन के समक्ष एक अभिनव सेवा प्रकल्प प्रस्तावित हुआ ‘पंचसहस्त्री विहार भक्ति परिवार’। यह हमारा परम् दायित्व है। ऐसे संघनिष्ठ परिवार की व्याख्या इस प्रकार से प्रस्ताावित है कि जो परिवार वर्षभर में 10 दिवस विहार सेवा में अर्पित करने हेतु संकल्पित हो वह ‘विहार भक्ति परिवार’ कहलाने का पात्र होगा। यह विहार सेवा परिवार का कोई भी सदस्य प्रदत्त कर सकेगा। सेवा की उपलब्धता चारित्रात्मा के प्रस्थान बिन्दु से गंतव्य स्ािान तक रहेगी। इसके अतिरिक्त सेवाकर्ता यदि स्थानीय पदाधिकारी हो तो उसका यह भी दायित्व होगा कि अपने क्षेत्र के 50 की.मी. के दायरे का मार्ग नक्शा बनवाकर केन्द्रीय कार्यालय को उपलब्ध कराए, साथी ही निम्न जानकारी भी कृपया देवें   1. गंतव्य स्थान की दुरी 2. रूकने का स्थान 3. शाकाहारी परिवार संख्या 4. संपर्क सूत्र