आचार्य श्री नानेश की पुण्य स्मृति में इस पुरस्कार की स्थापना की गई । यह पुरस्कार संप्रदाय निरपेक्ष दृष्टि से ऐसे व्यक्ति को दिया जाता है जिसने अपने जीवन में समता दर्शन व्यव्हार को आत्मसात कर रखा हो । अब तक 7 समता मनीषियों को इस पुरस्कार के अंतर्गत सम्मानित किया जा चुका है ।

भारतीय प्रशासनिक सेवा में उत्त्क्रष्ट कार्य करने वाले जैन मतावलंबी को यह पुरस्कार दिया जाता है ।

अब तक 18 विद्वानों को इस पुरस्कार के अंतर्गत उत्त्क्रष्ट कार्य करने वाले जैन मतावलंबी को यह पुरस्कार दिया जाता है

यह पुरस्कार उस व्यक्ति अथवा संस्था को दिया जाता है जिसने सार्वजानिक सेवा के किसी भी क्षेत्र में उत्त्क्रष्ट कार्य करते हुए नये कीर्तिमान स्थापित किये हों  ।

यहाँ पर पुरस्कार के बारे में थोड़ा विवरण दिया जाएगा, ताकि विजिटर यह जान सके की पुरस्कार की प्रवर्ति क्या है

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