श्री अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन संघ विधान

  • यह संघ, धर्म, मान्यता, संस्कृ ति, परम्परा, इतिहास, साहित्य, कला, धार्मिक समारोह इत्यादि के संबंध में भारत के ‘‘साधुमार्गी अनुयायीगण’’ का  प्रतिनिधि व प्रतिकृति है
  • यह संघ आचार्य श्री हुक्मीचन्द जी म.सा. की  शुद्ध पाट परम्परा में विद्यमान आचार्य श्री के प्रति पूर्णतः श्रद्धावनत रहेगा एवं उन्हीं की  मान्यताओं, धारणाओं एवं भावनाओं के अनुरूप कार्य करेगा।
  • यह संघ आचार्य श्री हुक्मीचन्द जी म.सा. की  शुद्ध पाट परम्परा में क्र मशः आचार्य श्री शिवलाल जी म.सा., आचार्य श्री उदयसागर जी म.सा., आचार्य श्री चौथमल जी म.सा., आचार्य श्री श्रीलाल जी म.सा., आचार्य श्री जवाहरलाल जी म.सा., आचार्य श्री गणेशलाल जी म.सा., आचार्य श्री नानालाल जी म.सा., वर्तमान आचार्य श्री रामलाल जी म.सा. के प्रति पूर्ण श्रद्धानिष्ठ रहकर कार्य करेगा, एवं आचार्यश्री के विचारों एवं मान्य सिद्धान्तों के प्रचार प्रसार के लिए साहित्य वितरण, शिविरायोजन इत्यादि मेें विभिन्न प्रकार से सक्रिय रहेगा। इस प्रकार भविष्य में भी उसी परम्परा में जो विधिवत आचार्य होंगे,उनके प्रति संघ पूर्णतः श्रद्धावनत रहेगा एवं उन्हीं की मान्यताओं, धारणाओं एवं भावनाओं के अनुरूप  कार्य करेगा।
संघ संविधान