बालक का मन कोरे कागज के समान होता है तथा इस पर जो अंकित कर दिया जाये वह उम्र भर उसके मस्तिष्क पटल पर स्थायी रूप से अंकित हो जाता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए संघ ने बालकों को सुसंस्कारित जीवन की ओर ढालने का एक अभूतपूर्व कार्य संस्कार शिविरों के माध्यम से किया है। ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन अवकाशों में अनेक स्थानों पर विशाल स्तर पर संस्कार शिविरों का आयोजन कर संस्कार क्रांति की अलख जगाने का महत्वपूर्ण कार्य संघ द्वारा किया जा रहा है। गत वर्ष 150 से अधिक स्थानों पर आयोजित शिविरो में 10,000 से अधिक शिविरार्थियों ने भाग लेकर अपने जीवन को विकास की ओर बढाने का संकल्प लिया। स्थानीय शिविरों के साथ-साथ संघ द्वारा क्षेत्रीय शिविरों का आयोजन भी किया जाता है।