आज से 44 वर्ष पूर्व अज्ञानता के भंवर में उलझे रूढवादिता एवं प्रचलित सामाजिक कुरूतियों से पिछडेपन का अभिशाप झेल रहे बलाई जाति के लोगों का कष्टकारी जीवन देखकर समता विभूति आचार्यश्री नानेश द्रवित हो उठे और उन्होंने मालवा के गुराडया ग्राम में शाकाहार, जीवदया, व्यसनमुक्ति, संस्कार क्रांति का बिगुल बजाकर हजारों बलाई जाति के लोगों का जीवन बदल कर एक क्रांतिकारी कदम उठाया। बलाई जाति के लोगों को शाकाहारी, व्यसनमुक्त एवं आदर्श गृहस्थ बनाकर समाज के समक्ष उपस्थित किया आज इनकी संख्या लाखों में है। साधुमार्गी जैन संघ ने गुरू आज्ञा को शिरोधार्य कर इस प्रवृत्ति को निरन्तर गति प्रदान की जिसके फलस्वरूप ४४ वर्ष पूर्व एक छोटे से विचारों का बीजारोपण आज वटवृक्षीय स्वरूप लिये हम सभी के मध्य पल्लवित होता दिखाई दे रहा है। धर्मपाल क्षेत्रों में संघ द्वारा समय-समय पर पद यात्रा, व्यसनमुक्ति रैली, संगोष्ठी का आयोजन, निःशुल्क कम्बल वितरण, धार्मिक शिविरों का आयोजन, धार्मिक पाठशालाओं का संचालन, पुस्तकालयों का संचालन आदि किये जाते है। गत चार वर्षों में इस प्रवृत्ति ने एक विस्तृत रूप ग्रहण किया है जिसके फलस्वरूप अनेक स्थानों पर समता भवनों का निर्माण हो चुका है तथा अनेक समता भवन निर्माणाधीन है। धर्मपाल भाईयों को संघ द्वारा रोजगार भी उपलब्ध करवाया जा रहा है। धर्मपाल समाज के बंधु आज शिक्षा की प्रवृत्ति को ग्रहण कर विधायक, डॉक्टर, इंजीनियर तथा अनेक उच्च पदों पर अपनी सेवाएं प्रदान कर संघ के गौरव द्विगुणीत कर रहे है।