समता संस्कार पाठशाला : यह संघ का प्रमुख प्रकल्प (Flagship Project ) माना जाता है ।  सुसंस्कारित बालकवृंद समजोत्थान की आधारशिला है । बच्चो में संस्कार निर्माण के उद्धेश्य से देशभर में विभिन्न केन्द्रों पर दैनिक व साप्ताहिक पाठशालाएं संचालित की जा रही हैं । 200 पाठशालाओं में 5382 अध्ययनरत बालक – बालिकाओं के हितार्थ 334 शिक्षिकाएं अपनी सेवाएँ प्रदान कर रही हैं । शिक्षार्थिओं दकस तत्वज्ञान से भी परिचित कराया जाता है ; वे संघ द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित धार्मिक परीक्षाओं में भी भाग लेते हैं । पाठशाला उपक्रम को विस्तृत व विकसित करने की दृष्टी से एक अभिनव परियोजना – ” Know & Grow ” संकल्पित हुई है । जैन तत्वों की सिख देने हेतु यह एक पुस्तक स्वरुप सुरुचिपूर्ण व सुबोधगम्य पठनसामग्री है  ।

समता संस्कार पाठशाला

समता प्रचार संघ : इस प्रवृति का उद्भव समता विभूति परम श्रद्धेय स्व. आचार्य प्रवर श्री नानालालजी म. सा. की सद्प्रेरणा से उदयपुर में सन् 1978 में हुआ। प्रवृति का उद्देश्य समता सिद्धांत दकस जन – जन तक पहुँचाने का रहा है । स्वाध्यायियों को तैयार करने के लिए समय – समय पर स्वाध्यायी प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन करना , पयुर्षण पर्वाराधन के पावन प्रसंग पर अधिकाधिक क्षेत्रों में धर्माराधना कराना इस प्रवृति के मुख्य कार्य हैं । वर्तमान में प्रतिवर्ष लगभग 500 स्वाध्यायी समता प्रचार संघ के माध्यम से लगभग 200 स्थलों पर स्वाध्यायी सेवा देते हैं ।

समता प्रचार संघ

समता संस्कार शिविर : संघ द्वारा बालक – बालिकाओं के चरित्र निर्माण हेतु प्रतिवर्ष सम्पूर्ण देश में क्षेत्रीय एवं स्थानीय समता संस्कार शिविरों का आयोजन किया जाता है । इन शिविरों के माध्यम से बालक – बालिकाओं दकस जैन धर्म का प्रारंभिक ज्ञान कराया जाता है साथ ही उन्हें व्यसनमुक्त एवं संस्कारयुक्त जीवन जीने की विशेष प्रेरणा दी जाती है । प्रतिवर्ष लगभग 8 से 10 हजार बालक – बालिकाएं समता संस्कार शिविरों में भाग लेते हैं ।

समता संस्कार शिविर