संघ द्वारा बालक-बालिकाओं के चारित्र निर्माण हेतु प्रतिवर्ष सम्पूर्ण देश में क्षेत्रीय एवं स्थानीय समता संस्कार शिविरों का आयोजन किया जाता है। इन शिविरों के माध्यम से बालक-बालिकाओं को जैन धर्म का प्रारम्भिक ज्ञान कराया जाता है साथ ही उन्हें व्यसनमुक्त एवं संस्कारयुक्त जीवन जीने की विशेष प्रेरणा दी जाती है। प्रतिवर्ष लगभग 8 से 10 हजार बालक-बालिकाएँ समता संस्कार शिविरों में भाग लेते हैं।

समय-समय पर आयोजित संस्कार शिविरों में संघ की Know & Grow परियोजना के अनुसार, प्रतिभागियों को विभिन्न जीवन मूल्यों का ज्ञान दिया जाता हैं। शिविर में आयोजित प्रतियोगिताओं में विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार दे कर अर्जित ज्ञान को व्यवहार में अपनाने हेतु प्रेरित किया जाता हैं।

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