इस प्रवृत्ति का उद्भव समता विभूति समीक्षणध्यान योगी आचार्य प्रवर 1008 श्री नानालालजी म.सा. की सत् प्रेरणा से  उदयपुर में सन् 1978 में हुआ। समता प्रचार संघ प्रवृत्ति का उद्देश्य समता सिद्धांत को जन-जन तक पहचाने का रहा है। सम्पूर्ण भारतवर्ष में विभिन्न प्रांतों के छोटे-छोटे क्षेत्रों में ऐसे अनेक गांव एवं कस्बे है जहां हमारे जैन परिवार निवासरत है। उन्हें चारित्र आत्माओं के प्रेरक उद्बोधन व संस्कार निर्माण संबंधी जानकारी नहीं मिल पाती है। स्वाध्यायियों को तैयार करने के लिये समय-समय पर स्वाध्यायी प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया जाता है। उन क्षेत्रों में समता प्रचार संघ के स्वाध्यायियों को भेजकर पर्युषण पर्व आराधना, धार्मिक पाठशाला, धार्मिक शिविर सफलतापूर्वक संपादित किये जाते है।

वर्तमान में लगभग 500 स्वाध्यायी समता प्रचार संघ के माध्यम से 200 स्थलों  पर स्वाध्यायियों ने अपनी  अमूल्य सेवाएं देकर संघ का गौरव बढाया है। पर्व आराधना के प्रसंग पर सेवा प्रदान करने वाले श्रेष्ठ स्वाध्यायियों का चयन कर प्रतिवर्ष उन्हें सम्मानित किया जाता है। समता प्रचार संघ का कार्यालय उदयपुर में स्थित है।

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