प्रभु महावीर के पावन् उपदेश “जीओ और जीने दो‘‘ के अनुरूप समाज जीवन की रचना करने के लिये संघ ने जीवदया प्रवृत्ति को सदैव ही आगे बढाया है। संघ द्वारा समय-समय पर हिंसक प्रयासों यथा कत्लखानों का निर्माण, हिंसा के लिये पशुपालन अंडो के सेवन का व्यापक एवं रचनात्मक विरोध कर जीवदया के कार्यों को गति दी है। संघ द्वारा अनेक गौशालाओं, चारा केन्द्रों, प्राणी रक्षा केन्द्रों में अनुदान दिया जाता है जिससे अनेक पशु-पक्षी पोषित हो रहे है। इस वर्ष संघ द्वारा कानोड स्थित श्री आदिनाथ पशु रक्षण संस्थान को इस प्रवृत्ति के अन्तर्गत गोद लिया है। अब यह संस्था भविष्य में संघ की प्रवृत्ति होगी।