श्रमणोपासक : यह हिंदी पाक्षिक संघ का मुखपत्र व प्रतिनिधिक विचार वाहिनी है जो संघ स्थापना के समकालीन विगत 54 वर्षो से अविरल प्रकाशित हो रहा है । पत्रिका में आचार्य भगवंतो के दिव्य प्रवचन व अमृतवाणी , जैन धर्म व दर्शन संदर्भित लेखन , संघ संबंधी सूचना , तथा अन्य नैतिक , मूल्य – आधारित , उत्प्ररेक व प्रेरणास्पद स्तम्भ प्रस्तुतियों की समाविष्टि होती है । अपने रुचिपूर्ण चित्तरंजन विषय – वस्तु के कारण ‘ श्रमणोपासक ‘ जनप्रिय तो है ही , साथ ही विवेकपूर्ण पाठक इसे समाज में जागृति व परिवर्तन के उद्दीपक के स्वरुप में आंकते हैं । वर्तमान में ‘ श्रमणोपासक ‘ के 18000 से अधिक आजीवन अभिदाता सदस्य हैं ।

साधुमार्गी पब्लिकेशन : संघ द्वारा जैन धर्म , दर्शन , आगम , कथा एवं प्रवचन से संदर्भित साहित्य का प्रकाशन किया जाता है । सत्साहिक का प्रकाशन संघ की महत्वपूर्ण प्रवृति है ।

आगम , अहिंसा – समता एवं प्राकृत संस्थान : जैन आगमों में निरुपित तत्व ज्ञान को कंठस्थ करने तथा उन पर चिंतन , मनन , अन्वेषण करने से शास्त्रों के गहन विषयों का भी सरलता से ज्ञान प्राप्त हो जाता है । तत्व प्रकाशन समिति द्वारा तत्व ज्ञान संबंधी 20 पुस्तकों का प्रकाशन किया जा चुका है ।

साधुमार्गी पब्लिकेशन 2019