समता विभूति आचार्यश्री नानेश ने अपने समता सिद्धांत के अनुरूप समता समाज की एक परिकल्पना समाज के सामने प्रस्तुत की थी। जिसका मूल बिन्दु था ऐसा समाज जो व्यसन और अपराध प्रवृत्ति से मुक्त हो जहां लोग प्रेम, स्नेह, भाईचारे की भावना से समाज के उत्थान में गतिशील हो। इस योजना का उद्देश्य गावों में सुराज की स्थापना के साथ-साथ शिक्षा, चिकित्सा की उन्नति, अपराध व्यसन से मुक्त और सुसंस्कार, समता, कर्त्तव्यशीलता और धर्ममय वातावरण का निर्माण कर अपराध मुक्त, व्यसनमुक्त, प्रदुर्षण मुक्त, भय-भूख मुक्त गांव की स्थापना करना है। इसके अन्तर्गत इस वर्ष छ.ग. के राजनांदगाँव जिले के धीरी ग्राम को आदर्श ग्राम के रूप में परिणित करने का निर्णय लिया गया है। शीघ्र ही और गांवों को गोद लेकर इस योजना को गति देने का कार्य किया जायेगा।