यह अप्रतिम ज्ञान भण्डार लगभग 75000 से अधिक पुस्तकों व दुर्लभ ग्रंथों से सुसज्जित है। अनेक हस्तलिखित पाण्डुलिपियां भी यहां संग्रहित हैं। इस केंन्द्र से चारित्रात्माओं, मुमुक्षुओं व स्वाध्यायियों के ज्ञानार्जन हेतु पठन-सामग्री उपलब्ध कराने का गुरूतर कार्य संपन्न होता है। भण्डार में संग्रहित व संरक्षित सभी पुस्तकों का कम्प्यूटरीकरण हो चुका है, जिसके चलते पुस्तकों के वितरण व व्यवस्थापन का कार्य सुगम व सुनियोजित हुआ है। भण्डार का संचयन जैन समाज की अनमोल धरोहर है। इस प्रवृति की प्रगति, स्वाध्याय व जैन विद्या में रूचि उजागर करने के पुनीत प्रयासों में संघ के योगदान की गौरवगाथा है।