जिनवाणी को जन-जन तक पहचाने चारित्र आत्माओं के प्रवचनों को व्यापक रूप से प्रचारित एवं प्रसारित करने संघ गतिविधियों से संघनिष्ठ श्रावकों को अवगत कराने एवं देश विदेश में जैन जगत् में कहां क्या कुछ हो रहा है। इत्यादि जानकारी देने हेतु संघ का मुखपत्र श्रमणोपासक (पाक्षिक) विगत 47 वर्षों से नियमित रूप से प्रकाशित हो रहा है। इस वर्ष श्रमणोपासक पत्रिका की गुणवता पर विशेष ध्यान देते हुए संघ द्वारा इस पत्रिका के कागज, छपाई, कलेवर को और अधिक सुदृढ बनाया गया है। साथ-साथ इसके अन्दर प्रकाशित होने वाले लेखों, कविता, समाचार आदि की गुणवता पर विशेष ध्यान दिया गया है। श्रमणोपासक के दिनांक 5 का अंक विचार प्रधान अंक तथा दिनांक 20 का अंक समाचार प्रधान अंक रखा गया है। विचार प्रधान अंक में अमृतवाणी, विद्वत खण्ड, बालबोध, स्वास्थ्य संजीवनी, नारी चेतना, युवा दर्पण आदि के स्तम्भ प्रकाशित कर उसे पठनीय सामग्रियों से युक्त बनाया गया है। श्रमणोपासक की आजीवन सदस्यता राशि 1000/- रूपये है। वर्तमान में इसकी सदस्यता अर्द्धमूल्य यानि रू. 500/- रखी गई है।