“खुद जीएं सबको जीना सीखाएं-अपनी खुशियाँ चलो बांट आएं” इस मूलमंत्र को आत्मसात् करते हुए श्री अ.भा. साधुमार्गी जैन महिला समिति के तत्वाधान में कई वर्षों से स्वधर्मी सहयोग की यह प्रवृत्ति निरनतर गतिशील है। मनुष्य की प्रथम आवश्यकता रोटी एवं कपडा है जिसके बगैर जीवन निर्वाह होना अत्यंत मुश्किल है। प्रख्यात जैनाचार्य श्री जवाहरलालजी म.सा. अपने प्रवचनो में फरमाया करते थे कि अगर हमने समाज के व्यक्तियों को सहयोग प्रदान नहीं किया, उन्हें आगे नहीं बढाया तो आने वाली पीढयां हमें कभी माफ नहीं कर सकती। इसी मूल मंत्र को ग्रहण कर संघ ने इस प्रवृत्ति के माध्यम से समाज के निराश्रित व्यक्तियों को सम्बल प्रदान किया। इस वर्ष संघ ने इस प्रवृत्ति पर विशेष ध्यान देते हुए अनेकानेक शुभ संकल्प लिये। जहां पूर्व में प्रति परिवार प्रति माह 300/- की राशि प्रदान की जाती थी उसे बढाकर अधिकतम 1000/- प्रति परिवार कर दिया गया है तथा यह राशि उन्हें चैक के माध्यम से त्रैमासिक प्रदान की जा रही है। इस प्रवृत्ति में संघ के दानमानी महानुभावों का विशेष योगदान इस प्रवृत्ति का मुख्य संबल है।