वीर सेवा समिति : वीर सेवा समिति का मुख्य लक्ष्य हैं कि वीर परिवार की सेवा , सुश्रुषा में संघ अपने दायित्व का निर्वहन करे । इस हेतु बिना ब्याज के ऋण सहायता भी दी जाती है ।

विहार सेवा समिति : चरित्रत्माओं के शेखेकाल विहार के समय संघ का विशेष दायित्व बनता है की उनकी विहार यात्रा में संघ सध्वोचित मर्यादा का पालन करते हुए सहयोगी बने । इस भावना को ध्यान में रखते हुए अपरिचित एवं दूरस्थ क्षेत्रों में विचरणरत चरित्रत्माओं के साथ जो विहार्कर्मी होते हैं उनकी सेवा , सुश्रुषा का दायित्व केन्द्रीय संघ वहां करता है ।

स्वधर्मी सहयोग : श्री अ.भा. साधुमार्गी जैन महिला समिति द्वारा संचालित इस प्रवृति के अंतर्गत जरुरतमंद स्वधर्मी परिवारों को प्रतिमाह आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है ।

छात्रवृति योजना : श्री अ.भ. साधुमार्गी जैन महिला समिति द्वारा 12 वीं कक्षा तक के विद्यार्थिओं को छात्रवृति प्रदान की जाती है ।

व्यसनमुक्ति एवं संस्कार जागरण : आचार्य श्री रामेश का प्रमुख सन्देश व्यसनमुक्ति आज के इस आधुनिक युग में अत्यंत प्रासंगिक है । अब तक इस कार्यक्रम में विद्यालयों , महाविद्यालयों , काराग्रहों एवं सार्वजानिक स्थलों पर भाषण , व्याख्यानमाला , प्रदर्शनी एवं रैलियों के माध्यम से लोगों को कुव्यसन त्यागने की उत्प्रेरणा देकर उन्हें व्यसनमुक्त करने का कार्य अनवरत किया जा रहा है ।

सेठ घेवरचंद केसरीचंद गोलछा जवाहर स्मृति व्याख्यानमाला निधि : इस व्याख्यानमाला का उद्देश्य जैन धर्म , दर्शन एवं संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में विद्वानों के चिंतन को जैन एवं जैनेतर वर्ग तक पहुँचाना है । अब तक संघ द्वारा 13 व्याख्यानमालाओं का आयोजन किया जा चूका है जिनमें लब्धप्रतिष्टित विद्वानों के भाषण हुए ।

साधुमार्गी प्रतिभा खोज कार्यक्रम : साधुमार्गी जैन संघ के देशव्यापी परिवारों में परस्पर संपर्क किया जा सके , उनके बालक – बालिकाओं की शिक्षा एवं प्रतिभा से सभी अवगत हो सकें , इन सब उदेश्यों हेतु समता युवा संघ के माध्यम से साधुमार्गी प्रतिभा खोज कार्यक्रम अनवरत जारी है ।

श्रमणोपासक अभिनन्दन संग्रह : श्रमणोपासक अभिनन्दन संग्रह नामक संकलन प्रस्तावित है जो एक संग्राहिक / चित्रावली (एलबम ) के स्वरुप में होगा जिसमे भारत में व विदेश में निवासरत सभी साधुमार्गी परिवारों के सदस्यों के छायाचित्र (फोटो )  अंतरविष्ट होंगे ।

समता भवन निर्माण : श्रावक – श्राविकाएं धर्माराधना हेतु गाँव / नगर में समता भवनों का निर्माण करवाते है । सम्पूर्ण देश में कई स्थलों पर समता भवन निर्मित है जहाँ नियमित धर्माराधना होती है तथा संयमी मर्यादा के अनुरूप चरित्रत्माओं का चातुर्मास एवं शेखेकाल में वहां बिराजना होता है ।