कुव्यसन समाज के लिये एक ऐसा अभिशाप है जो एक पीढी को नहीं बल्कि अनेकों पीढयों को नष्ट कर देता है। व्यसन करने वाले व्यक्ति को स्वयं का भान नहीं रहता। आज के इस भौतिक युग में धूम्रपान, शराब, मांस, अंडा आदि ऐसे अनेक कुव्यसन है जो सभ्य समाज के लिये घातक है। इन्हीं कुव्यसनों को मिटाने के लिये शास्त्रज्ञ, तरूण तपस्वी, व्यसनमुक्ति प्रणेता आचार्यश्री रामलालजी म.सा. ने निम्बाहेडा चातुर्मास में अपने प्रिय भारतदेश को व्यसनमुक्त और संस्कारवान बनाने हेतु आह्वान किया। आचार्य प्रवर की भावना के अनुसार संघ ने सम्पूर्ण देश में व्यसनमुक्ति एवं संस्कार जागरण की एक अभूतपूर्व अलख पैदा कर इस प्रवृत्ति को आगे बढाने का संकल्प लिया। संकल्प दृढ था और इरादे मजबूत फलस्वरूप आज यह प्रवृत्ति एक विस्तृत आकार ले चुकी है। केन्द्रीय संघ एवं इसकी स्थानीय शाखाओं द्वारा समय-समय पर व्यसनमुक्ति रैली, प्रदर्शनी, व्याख्यानमाला, प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। साथ ही साथ चल वाहन प्रदर्शनी के माध्यम से लोगों को कुव्यसनों के परिणाम के विषय में जानकारी प्रदान की जाती है। विद्यालयों, महाविद्यालयों, छात्रावासों, सार्वजनिक स्थलों आदि में व्यसनमुक्ति पर आधारित फिल्म दिखाकर उन्हें सभ्य समाज से जोडने का प्रयास किया जाता है। आज तक लगभग 20,000,00 लाखों लोगों ने इस प्रवृत्ति से जुडकर व्यसनमुक्त बनने का संकल्प कर इसे और अधिक दृढता प्रदान की है। इस वर्ष संघ द्वारा इस प्रवृत्ति का संचालन श्री अ. भा. साधुमार्गी जैन समता युवा संघ के कार्यकर्ताओं को सौंपकर युवाओ को इस क्षेत्र में आगे आने का अवसर प्रदान किया है।